‘स्मार्टफोन में अनिवार्य ऐप’: ज्योतिरादित्य सिंधिया के दावे पर विवाद — सोशल मीडिया पर बोले ‘झूठ’

By Shreya

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‘स्मार्टफोन में अनिवार्य ऐप’: ज्योतिरादित्य सिंधिया के दावे पर विवाद — सोशल मीडिया पर बोले ‘झूठ’

New Delhi: केंद्र सरकार के दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के उस बयान के बाद विवाद गहरा गया है, जिसमें उन्होंने सोमवार को संसद भवन परिसर के बाहर कहा था कि “संचार साथी” ऐप पूरी तरह वैकल्पिक है और यह किसी प्रकार की जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग का माध्यम नहीं है।

हालाँकि, उनके इस दावे को लेकर सोशल मीडिया पर तुरंत असहमति जताई जाने लगी। कई यूज़र्स ने 28 नवंबर को जारी हुए Department of Telecommunications (DoT) के आदेश की कॉपी साझा की, जिसमें मोबाइल कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि “संचार साथी” ऐप को नॉन-रिमूवेबल (गैर-हटाने योग्य) बनाया जाए।

DoT आदेश और मंत्री के बयान में विरोधाभास

DoT के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ऐप मोबाइल फोन में पहले से इंस्टॉल किया जाएगा और यूज़र द्वारा इसे हटाना या अनइंस्टॉल करना संभव नहीं होगा। यानी, यदि ऐप वैकल्पिक होता, तो ऐसा आदेश देने की जरूरत नहीं होती। इसलिए, सोशल मीडिया उपयोगकर्ता और गोपनीयता अधिकारों के समर्थक इसे बड़े पर्दे पर मंडराते हुए कह रहे हैं कि मंत्री का बयान “गुमराह करने वाला” है। कई लोग इसे गोपनीयता और नागरिक अधिकारों की अनदेखी करार दे रहे हैं।

नागरिकों की चिंता और आलोचना

  • लोगों का कहना है कि जब एक सरकारी आदेश स्पष्ट रूप से कह रहा है कि ऐप हटाना संभव नहीं है, तो इसे वैकल्पिक कहकर प्रचार करना जनता को गुमराह करना है।
  • डेटा सुरक्षा और निजता के अधिकारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
  • आलोचकों का मानना है कि अगर सरकार को नागरिकों की सुरक्षा तथा गोपनीयता की चिंता होती, तो इस तरह के आदेश नहीं दिए जाते।

राजनीतिक गरमाहट का अंदेशा

इस मुद्दे से फिर से सियासी बहस के चलने की संभावना है। विपक्ष और नागरिक अधिकार समूहों द्वारा सरकार की आलोचना की जा सकती है। कई बड़े हलकों में अब यह चर्चा तेज हो रही है कि क्या वास्तव में नागरिकों की सहमति और निजता का सम्मान किया जा रहा है या केवल नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश हो रही है।

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