हजारीबाग में वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री और नियमविरुद्ध म्यूटेशन के बहुचर्चित मामले में आरोपी ऑटोमोबाइल कारोबारी विनय सिंह को गुरुवार को बड़ा झटका लगा है। झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज करते हुए बेल देने से इनकार कर दिया है।
यह मामला उस दौरान जुड़ा है जब आईएएस विनय चौबे हजारीबाग के डीसी थे और कथित रूप से उनके कार्यकाल में वन भूमि को गलत तरीके से खरीद-बिक्री और म्यूटेशन किया गया था। इसी मामले में विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह आरोपी बनाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत याचिका?
न्यायमूर्ति जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में आज जमानत पर सुनवाई हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर आर्थिक अनियमितताओं और सरकारी भूमि के अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। इसलिए कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
किस भूमि को लेकर है मामला?
ACB की एफआईआर संख्या 11/2025 के अनुसार —
- यह भूमि सदर अंचल, हजारीबाग, थाना नंबर 252 में स्थित है।
● खाता नंबर 95 के प्लॉट 1055, 1060 और 848 — कुल 28 डिसमिल
● खाता नंबर 73 के प्लॉट 812 — कुल 72 डिसमिल
● कुल मिलाकर 1 एकड़ (करीब 100 डिसमिल) भूमि विवाद में है।
● जांच में सामने आया कि यह भूमि वन विभाग से संबंधित थी, जिस पर अवैध तरीके से खरीद-बिक्री और म्यूटेशन कराया गया।
ACB के अनुसार, इन सभी प्लॉटों पर वर्तमान में विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह का कब्जा है, और इस भूमि पर नेक्सजेन शोरूम संचालित किया जा रहा है।
आगे की प्रक्रिया
हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब विनय सिंह को निचली अदालत में ट्रायल का सामना करना होगा। यदि वे चाहें तो सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं।
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