हजारीबाग भूमि घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। झारखंड हाईकोर्ट ने नेक्सजेन कंपनी के मालिक विनय सिंह की जमानत याचिका को खारिज करते हुए इसे “योजनाबद्ध और गंभीर धोखाधड़ी का स्पष्ट उदाहरण” बताया है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारी द्वारा निजी लाभ के लिए सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग न केवल गंभीर अपराध है, बल्कि इससे समाज के नैतिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचता है।
एसीबी की दलील : यह सिर्फ भूमि विवाद नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एसीबी (ACB) ने कोर्ट के सामने कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं। एसीबी ने कहा कि यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें—
- पद का दुरुपयोग
- भ्रष्टाचार
- दस्तावेजों की जालसाजी
जैसी गंभीर अपराधों का संगठित रूप सामने आया है।
जांच के दौरान तत्कालीन अंचल अधिकारी अलका कुमारी ने स्वीकार किया कि तत्कालीन उपायुक्त ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाकर विनय सिंह के पक्ष में म्यूटेशन करने का दबाव बनाया था। साथ ही जांच में यह भी पाया गया कि विनय चौबे और उनके परिवार के खातों में विनय सिंह की कंपनी से करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
कोर्ट : सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से देश के वित्तीय ढांचे को खतरा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहली नजर में यह मामला एक—
- गंभीर अपराध,
- योजनाबद्ध धोखाधड़ी
- और शासन तंत्र व कानूनी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग का उदाहरण
है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके किया गया आर्थिक अपराध राष्ट्र के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
मनी ट्रेल व डिजिटल साक्ष्य विश्वसनीय : हाईकोर्ट
- बैंक खातों के लेनदेन,
- मनी ट्रेल,
- डिजिटल सबूत
- और दस्तावेजों में जालसाजी
को कोर्ट ने विश्वसनीय माना।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी को जमानत देने पर सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है, इसलिए जमानत से इनकार किया जाता है।
जमानत याचिका खारिज
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विनय सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी और मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि इस चरण पर आरोपी को रिहा किया जाना जांच के लिए हानिकारक होगा।
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