नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने झारखंड के साहिबगंज जिले के नींबू पहाड़ में अवैध पत्थर खनन मामले की जांच CBI से जारी रखने की अनुमति दे दी है। जस्टिस आलोक राठे और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने यह आदेश CBI की उस याचिका पर दिया, जिसमें एजेंसी ने आरोप लगाया था कि झारखंड सरकार जांच में बाधा डाल रही है।
अवैध पत्थर खनन मामला
यह मामला लगभग 1,500 करोड़ रुपये के अवैध पत्थर खनन घोटाले से संबद्ध है। इस घोटाले की जांच साल 2022 में ED ने शुरू की थी और इसी दौरान झामुमो के प्रभावशाली नेता पंकज मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था।
विजय हांसदा ने भी की थी याचिका दायर
साहिबगंज के निवासी विजय हांसदा ने भी एक याचिका दायर कर पंकज मिश्रा, खनन विभाग के अधिकारियों और खनन माफिया की भूमिका पर सवाल उठाए थे। बाद में हांसदा ने आरोप लगाया कि ईडी ने उन पर दबाव बनाया और इसलिए वह अपनी याचिका वापस लेना चाहते हैं।
लेकिन झारखंड हाई कोर्ट ने उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं दी। इसके बजाय हाई कोर्ट ने CBI को हांसदा के आचरण के साथ-साथ आरोपी पक्ष की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की
इसके खिलाफ झारखंड सरकार और विजय हांसदा, दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। उनका कहना था कि हाई कोर्ट ने CBI को सिर्फ “आचरण की जांच” करने का आदेश दिया था, न कि पूरे अवैध खनन मामले को हैंडल करने का।
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि CBI को पूरे मामले की जांच करने का अधिकार होगा। इस तरह हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
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