Dhanbad: केंदुआडीह क्षेत्र में जहरीली गैस रिसाव की गंभीर समस्या के 15वें दिन मंगलवार को राहत की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम उठाया गया। प्रभावित राजपूत बस्ती में पुराने जीएम बंगला के समीप बोरहोल (ड्रिलिंग) की प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही भूमिगत गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी उपायों पर भी अमल शुरू हो गया है।
प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि कोलकाता से लगभग 14 हजार लीटर लिक्विड नाइट्रोजन मंगाई गई है। इस नाइट्रोजन का उपयोग बोरहोल के माध्यम से भूमिगत गैस पर काबू पाने के लिए किया जाएगा। ड्रिलिंग का कार्य मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमईसीएल) द्वारा किया जा रहा है, जबकि नाइट्रोजन फिलिंग और तकनीकी सहयोग धनसार माइंस रेस्क्यू स्टेशन के विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध करा रही है।
कार्य शुरू होने से पहले जिला आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से माइकिंग कर लोगों से बोरहोल क्षेत्र के आसपास न जाने की अपील की गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे इलाके को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मौके पर डीजीएमएस (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी) और सिंफर (सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च) के वैज्ञानिकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
इस पूरे अभियान में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, सीएमपीडीआई और सिंफर समेत कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नाइट्रोजन गैस डालकर भूमिगत कार्बन मोनोऑक्साइड के दबाव को कम किया जाएगा, जिससे गैस रिसाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों ने इस पहल को पिछले 15 दिनों से चल रहे जन आंदोलन की सफलता बताया है। उनका कहना है कि लगातार दबाव और मांग के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने ठोस कदम उठाया है। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि इस तकनीकी प्रक्रिया से जल्द ही जहरीली गैस पर पूरी तरह काबू पा लिया जाएगा और क्षेत्र में हालात सामान्य हो सकेंगे।






