Jamshedpur: कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम एक बार फिर विवादों में है। दवा घोटाले के खुलासे के बाद पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने गंभीरता से मामले की जांच शुरू कर दी है। उपायुक्त ने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जो जल्द ही रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला?
एमजीएम अस्पताल में दवा खरीद और स्क्रैप बिक्री में अनियमितता की बात सामने आई है। आरोप है कि अस्पताल में मरीजों के लिए दवाएं बिना टेंडर प्रक्रिया के हर महीने खरीदी जा रही थीं। जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में प्रतिमाह बिना टेंडर के करीब 30 लाख रुपये की दवा खरीदी जाती रही, जो सालाना करीब 3 करोड़ 60 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। बताया गया है कि पिछले चार वर्षों से किसी भी दवा खरीद के लिए टेंडर नहीं हुआ है। मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
विधानसभा में उठा था मामला
विधायक सरयू राय ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया था। उनके खुलासे के बाद मामले को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठने लगे हैं।
विपक्ष का हमला
दवा और स्क्रैप बिक्री घोटाले को लेकर भाजपा और जेडीयू नेताओं ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है, जहां दोगुनी कीमत पर दवाएं खरीदकर करोड़ों रुपयों का घोटाला किया जा रहा है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अस्पताल में पहुंचने वाले गरीब मरीजों को दवा उपलब्ध नहीं होती और उन्हें बाहर से दवा खरीदने के लिए कहा जाता है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों से दवा खरीद का टेंडर न होना घोटाले का सबसे बड़ा प्रमाण है, और विभाग में नीचे से ऊपर तक मिलीभगत के कारण गरीबों के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट की जा रही है।
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