Ayodhya: सनातन परंपरा और रामभक्ति के केंद्र अयोध्या में 25 नवंबर का दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा विजय ध्वज फहराने के भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होकर इस अद्वितीय क्षण के साक्षी बनेंगे। कार्यक्रम को लेकर अयोध्या नगरी पूरी तरह सज-धजकर तैयार है।
PM मोदी करेंगे ध्वजारोहण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के शिखर पर विशेष रूप से तैयार भगवा विजय ध्वज फहराएंगे। यह समारोह संस्कृति, परंपरा और आस्था का अद्वितीय संगम होगा।
ध्वज की खासियत
- ध्वज अहमदाबाद की एक विशेषज्ञ कंपनी द्वारा तैयार किया गया है।
- इसे विशेष पैराशूट फैब्रिक और रेशमी धागों से बनाया गया है ताकि मौसम की कठिन परिस्थितियों—सूरज, हवा, बारिश—का सामना कर सके।
- ध्वज पर तीन मुख्य प्रतीक होंगे—ॐ, सूर्य और कोविदार वृक्ष।
- सूर्य: भगवान राम की सूर्यवंशीय परंपरा का प्रतीक।
- कोविदार वृक्ष: वाल्मीकि रामायण में वर्णित पवित्र वृक्ष।
शास्त्रीय अनुष्ठान
ध्वजारोहण से पहले होने वाले सभी अनुष्ठान 108 आचार्यों द्वारा संपन्न किए जाएंगे।
इनका नेतृत्व काशी के प्रसिद्ध विद्वान गणेश्वर शास्त्री करेंगे।
आचार्य अयोध्या, काशी और दक्षिण भारत से विशेष रूप से आमंत्रित किए गए हैं।
कार्यक्रम की भव्यता और सुरक्षा
लगभग चार घंटे चलने वाले इस महाआयोजन में—
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- हजारों साधु-संत
- 7,000 से अधिक विशिष्ट अतिथि
शामिल होंगे।
अयोध्या एयरपोर्ट पर रिकॉर्ड उड़ानें
25 नवंबर को अयोध्या एयरपोर्ट पर 80 चार्टर्ड विमानों के उतरने की संभावना है, जिससे शहर में सुरक्षा और प्रबंधन के विशेष इंतज़ाम किए गए हैं।
सुग्रीव पथ का उद्घाटन
मंदिर परिसर में निकास मार्ग को अब ‘सुग्रीव पथ’ नाम दिया गया है, जो रामायण की परंपरा और भावनाओं को और मजबूत करता है।
पूरे शहर में सजावट और विशेष इंतजाम
- मंदिर परिसर और सभी सहायक मंदिर—भगवान महादेव, गणेश, हनुमान, सूर्यदेव, मां भगवती, मां अन्नपूर्णा और शेषावतार—को भव्य रूप से सजाया गया है।
- पूरे मंदिर क्षेत्र में आकर्षक लाइटिंग और फूलों की सजावट की गई है।
- पेड़ों को भी आकर्षक कलात्मक सजावट से संवारा गया है।
बदला गया दर्शन का समय
ध्वजारोहण कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए मंदिर दर्शन समय बढ़ा दिया गया है।
अब श्रद्धालु सुबह 7 बजे से रात 9:15 बजे तक दर्शन कर सकेंगे।
Also Read: झारखंड में अगले तीन दिनों तक ठंड से राहत, 26 नवंबर के बाद फिर गिरेगा पारा












