मुंबई: श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी और मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले तैयार की गई बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘इक्कीस’ का फाइनल ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। यह फिल्म भारत के वीर सैन्य नायक सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन, साहस और सर्वोच्च बलिदान को बड़े पर्दे पर सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करती है।
दमदार स्टारकास्ट और बदली रिलीज डेट
फिल्म में मुख्य भूमिका में अगस्त्य नंदा नजर आ रहे हैं, जो अरुण खेत्रपाल के किरदार को निभा रहे हैं। उनके साथ धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत जैसे अनुभवी कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। पहले यह फिल्म 25 दिसंबर 2025 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी नई रिलीज तारीख 1 जनवरी 2026 तय की गई है।
भावनाओं से भरा ट्रेलर
इक्कीस’ का ट्रेलर देश के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता की कहानी को बेहद भावुक अंदाज में पेश करता है। अगस्त्य नंदा ने अरुण खेत्रपाल के किरदार को पूरी गंभीरता और प्रभाव के साथ जीवंत किया है, जो दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ता है।
एक्शन के साथ निजी रिश्तों की झलक
ट्रेलर में जहां जबरदस्त सैन्य एक्शन देखने को मिलता है, वहीं अरुण खेत्रपाल के निजी जीवन और भावनात्मक पहलुओं को भी खास जगह दी गई है। देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और परिवार के साथ उनके रिश्तों को बखूबी दर्शाया गया है, जो उनके बलिदान की भावना को और मजबूत करता है।
धर्मेंद्र का डायलॉग बना ट्रेलर की जान
फाइनल ट्रेलर का सबसे भावनात्मक पल वह संवाद है, जब धर्मेंद्र अपने किरदार में कहते हैं “यह मेरा छोटा बेटा मुकेश है, 50 साल का है… और यह मेरा बड़ा बेटा अरुण है, जो हमेशा इक्कीस साल का ही रहेगा।” इस डायलॉग ने दर्शकों को भावुक कर दिया है और ट्रेलर को यादगार बना दिया है।
अरुण खेत्रपाल की सैन्य यात्रा
सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने इंडियन मिलिट्री एकेडमी से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 17 पूना हॉर्स रेजिमेंट को जॉइन किया था। दिसंबर 1971 में बसंतर की ऐतिहासिक लड़ाई के दौरान उन्होंने अपनी स्क्वाड्रन का नेतृत्व करते हुए दुश्मन के खिलाफ मोर्चा संभाला।
अद्वितीय वीरता और सर्वोच्च बलिदान
बारूदी सुरंगों से भरे क्षेत्र और भीषण गोलीबारी के बीच अरुण खेत्रपाल ने दुश्मन के 10 टैंकों को ध्वस्त कर दिया। उनका टैंक आग की चपेट में आने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी पोस्ट छोड़ने से इनकार कर दिया।
परमवीर चक्र से सम्मान
अरुण खेत्रपाल की इस असाधारण वीरता और अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र, भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान प्रदान किया गया। फिल्म ‘इक्कीस’ उनके साहस और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास है।
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