रांची: 15 वर्षों से लंबित 140 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि की वसूली को लेकर कॉमर्शियल कोर्ट के आदेश पर बिजली विभाग के तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। यह कार्रवाई सिविल कोर्ट रांची के नाजिर मो. जीशान इकबाल के नेतृत्व में की गई।
कॉमर्शियल कोर्ट का आदेश
इससे पहले कॉमर्शियल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश रवि नारायण की अदालत ने कॉमर्शियल एग्जीक्यूशन केस संख्या 98/2025 की सुनवाई करते हुए बकाया रकम की वसूली के लिए बिजली विभाग के बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश दिया था।
बैंक ऑफ इंडिया में खाते सील
बिजली विभाग के जिन तीन खातों को फ्रीज किया गया है, वे रांची के क्लब साइड मेन रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा में हैं। यह कार्रवाई थड़पखना स्थित फर्म मेसर्स क्रिस्टल कंप्यूटर इनफॉर्मेटिक्स सेंटर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर मामले के तहत की गई है।
2015 में आया था भुगतान का आदेश
फर्म के संचालक दिनेश्वर पांडेय ने वर्ष 2014 में झारखंड माइक्रो, स्मॉल एंड एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल में आर्बिट्रेशन का मामला दर्ज कराया था। सुनवाई के बाद 4 फरवरी 2015 को काउंसिल ने बिजली विभाग को फर्म की बकाया राशि 140 करोड़ 80 लाख 29 हजार 113 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था।
10 साल बाद भी नहीं मिला भुगतान
आदेश पारित होने के लगभग 10 वर्ष बीत जाने के बावजूद बिजली विभाग ने उक्त राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद फर्म ने बकाया वसूली के लिए सिविल कोर्ट रांची स्थित कॉमर्शियल कोर्ट में एग्जीक्यूशन केस दर्ज कराया।
वर्ष 2002 में हुई थी एजेंट की नियुक्ति
बिजली विभाग ने वर्ष 2002 में विधिवत रूप से क्रिस्टल कंप्यूटर इनफॉर्मेटिक्स सेंटर प्राइवेट लिमिटेड को उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कार्यों के लिए एजेंट नियुक्त किया था। फर्म को मीटर रीडिंग, मीटर सर्विलेंस, बिल तैयार करना और उपभोक्ताओं तक बिल वितरण जैसे कार्य सौंपे गए थे।
आठ वर्षों तक किया गया काम
बिजली विभाग के निर्देश पर फर्म ने वर्ष 2002 से 2010 तक लगातार इन सेवाओं का संचालन किया। हालांकि, इतने वर्षों तक काम करने के बावजूद फर्म को उसका पारिश्रमिक नहीं दिया गया।
कानूनी लड़ाई के बाद खाते फ्रीज
पारिश्रमिक नहीं मिलने पर फर्म ने वर्ष 2014 में झारखंड माइक्रो स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल में आर्बिट्रेशन का सहारा लिया। जब वहां से आदेश मिलने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ, तो अंततः सिविल कोर्ट रांची में एग्जीक्यूशन मुकदमा दायर किया गया, जिसके बाद अब बिजली विभाग के बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं।






