Ranchi: रांची स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP) में तैनात सुरक्षा गार्ड कमलेश प्रसाद की हत्या मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अपर न्याययुक्त शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने आरोपित रवि साहू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप को साबित करने में विफल रहा।
क्या था मामला?
यह घटना 28 अक्टूबर 2021 की है। रात करीब 9:30 बजे 52 वर्षीय कमलेश प्रसाद रिनपास के गेट के पास ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने उसी कंपनी के सुरक्षा गार्ड रवि साहू को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
हत्या के पीछे नौकरी विवाद का शक
सीआईपी परिसर में निजी सुरक्षा एजेंसी एसआईएस द्वारा दोनों—कमलेश प्रसाद और रवि साहू—को सुरक्षा गार्ड की नौकरी दी गई थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि दोनों के बीच ओपीडी ड्यूटी के दौरान विवाद हुआ था।
इसके अलावा, कमलेश का एक रिश्तेदार भी एसआईएस में कार्यरत था, जिससे रवि की पहले भी बहस हो चुकी थी। विवाद बढ़ने के बाद एजेंसी ने रवि को नौकरी से निकाल दिया था। इस कारण रवि को शक था कि कमलेश की वजह से उसे नौकरी से हटाया गया।
पुलिस ने दावा किया था कि इसी रंजिश में रवि ने गुस्से में आकर कमलेश की गोली मारकर हत्या कर दी।
कोर्ट ने क्यों बरी किया आरोपी?
अदालत ने कहा कि:
- हत्या से जोड़ने वाले पुख्ता सबूत प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
- पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
- संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
इस आधार पर आरोपी रवि साहू को अदालत ने बरी कर दिया। इस फैसले के बाद मामले का कानूनी अध्याय फिलहाल समाप्त हो गया है, हालांकि यदि चाहें तो अभियोजन पक्ष उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
CIP सुरक्षा गार्ड हत्याकांड: कोर्ट का फैसला, आरोपी रवि साहू साक्ष्य के अभाव में बरी
रांची स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP) में तैनात सुरक्षा गार्ड कमलेश प्रसाद की हत्या मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अपर न्याययुक्त शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने आरोपित रवि साहू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप को साबित करने में विफल रहा।
क्या था मामला?
यह घटना 28 अक्टूबर 2021 की है। रात करीब 9:30 बजे 52 वर्षीय कमलेश प्रसाद रिनपास के गेट के पास ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने उसी कंपनी के सुरक्षा गार्ड रवि साहू को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
हत्या के पीछे नौकरी विवाद का शक
सीआईपी परिसर में निजी सुरक्षा एजेंसी एसआईएस द्वारा दोनों—कमलेश प्रसाद और रवि साहू—को सुरक्षा गार्ड की नौकरी दी गई थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि दोनों के बीच ओपीडी ड्यूटी के दौरान विवाद हुआ था।
इसके अलावा, कमलेश का एक रिश्तेदार भी एसआईएस में कार्यरत था, जिससे रवि की पहले भी बहस हो चुकी थी। विवाद बढ़ने के बाद एजेंसी ने रवि को नौकरी से निकाल दिया था। इस कारण रवि को शक था कि कमलेश की वजह से उसे नौकरी से हटाया गया। पुलिस ने दावा किया था कि इसी रंजिश में रवि ने गुस्से में आकर कमलेश की गोली मारकर हत्या कर दी।
कोर्ट ने क्यों बरी किया आरोपी?
अदालत ने कहा कि:
- हत्या से जोड़ने वाले पुख्ता सबूत प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
- पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
- संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
इस आधार पर आरोपी रवि साहू को अदालत ने बरी कर दिया।
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