Ranchi: रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार जेल में तैनात उच्च कक्षपाल राहुल कश्यप को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। गृह एवं कारा विभाग द्वारा की गई जांच में कई गंभीर खुलासों के बाद यह कार्रवाई की गई। जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने गुरुवार को बर्खास्तगी से संबंधित आदेश जारी किया।
जांच में यह सामने आया कि राहुल कश्यप एक सजायाफ्ता अपराधी है, लेकिन उसने यह तथ्य छुपाकर वर्ष 2017 में कक्षपाल के पद पर नौकरी हासिल कर ली थी। इसके बाद कारा विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसने अपनी रिपोर्ट में राहुल को दोषी ठहराते हुए उसे सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की थी।
किसी तरह का भुगतान नहीं मिलेगा
विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राहुल कश्यप को सेवा से बर्खास्त करने के बाद किसी प्रकार का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया जाएगा। कारा हस्तक नियम 2025 के विभागीय कार्यवाही के चेप्टर 22 के रूल 255 एवं 256 तथा सरकारी सेवक नियमावली 3(1)(3) के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर यह फैसला लिया गया।
दुष्कर्म के मामले में मिली थी 10 साल की सजा
जांच में पता चला कि राहुल कश्यप के खिलाफ 26 सितंबर 2010 को दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ था। न्यायालय ने उसे दस वर्ष की सजा सुनाई थी। 22 अप्रैल 2014 से 28 अप्रैल 2014 तक वह खूंटी उपकारा में सजावार बंदी के रूप में रहा। इसके बाद 29 अप्रैल 2014 को उसे होटवार जेल में स्थानांतरित किया गया, जहां वह सितंबर 2014 तक बंद रहा। 18 सितंबर 2014 को उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली और वह जेल से बाहर आया।
जमानत के बाद नौकरी की तलाश, सूचना छुपाकर बहाली
जमानत के बाद राहुल ने नौकरी की तलाश शुरू की। वर्ष 2017 में कक्षपाल बहाली के विज्ञापन के दौरान उसने आवेदन किया और उसे बहाल भी कर दिया गया। लेकिन उसने अपने आवेदन पत्र में सजायाफ्ता होने की बात छुपाई, जो गंभीर अपराध माना गया।






