Dhanbad: आईआईटी आईएसएम धनबाद में “बिल्डिंग सेफर वर्कप्लेस: अंडरस्टैंडिंग द पोश एक्ट, 2013” विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला जीजेएलटी में शाम 4 बजे से 6 बजे तक आयोजित हुई, जिसमें शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के डॉ. पंकज के. पी. श्रेयस्कर ने संसाधक के रूप में सत्र का संचालन किया।
कार्यशाला में शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों, छात्रों, शोधार्थियों और प्रोजेक्ट स्टाफ ने भाग लिया। संस्थान प्रशासन ने कार्यक्रम से पूर्व सभी डीन, विभागाध्यक्षों और सेक्शन हेड्स से व्यापक उपस्थिति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था, ताकि सुरक्षित और संवेदनशील कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य को मजबूत किया जा सके।
सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. श्रेयस्कर ने कहा कि किसी भी संस्थान का सुचारू संचालन केवल कानूनों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि प्रभावी प्रबंधन, पेशेवर नैतिकता और आपसी भरोसे पर आधारित होता है। उन्होंने बताया कि खुली चर्चा, मतभेदों का सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने से ही उत्पादकता, ईमानदारी और बौद्धिक स्वतंत्रता विकसित होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई संस्थागत विवाद आपसी विश्वास की कमी के कारण उत्पन्न होते हैं, इसलिए संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। पोश कानून के तहत गठित समितियाँ अर्द्ध-न्यायिक रूप से कार्य करती हैं, इसीलिए उनके निर्णय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। डॉ. श्रेयस्कर ने स्पष्ट किया कि बिना सुनवाई और खुले मन से विचार किए बिना किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचना चाहिए।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने सामाजिक मानकों के प्रति जागरूक रहने, लैंगिक संवेदनशीलता को अपनाने और सकारात्मक संस्थागत संस्कृति विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है, और ऐसे प्रशिक्षण व कार्यशालाएँ इस दिशा में अत्यंत सहायक होती हैं।कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. मृणालिनी पांडेय, प्रेसीडिंग ऑफिसर/आईसी, के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद उप निदेशक प्रो. धीरज कुमार ने डॉ. श्रेयस्कर का सम्मान किया। इस अवसर पर संस्थान के रजिस्ट्रार श्री प्रभोध पांडेय और डीन (एकेडमिक) प्रो. एम. के. सिंह सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।






