पलामू: साल 2025 झारखंड के वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद अहम साबित हुआ है। पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) राज्य में बाघ संरक्षण का केंद्र बनकर उभरा है। पहली बार झारखंड में एक बाघ का सफल रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित स्थान पर रखा गया, जिससे संरक्षण प्रयासों को नई पहचान मिली।
पहली बार बाघ का सफल रेस्क्यू, ‘सम्राट’ बना मिसाल
जून 2025 में सिल्ली क्षेत्र के एक घर में घुसे बाघ को करीब 13 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाला गया। ‘सम्राट’ नाम दिया गया यह बाघ बंगाल तक की लंबी दूरी तय कर वापस लौटा था। यह झारखंड में बाघ संरक्षण के इतिहास में पहली ऐसी सफल कार्रवाई मानी जा रही है।
पीटीआर में बढ़ी बाघों की संख्या
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना के अनुसार, पीटीआर में बाघों की संख्या बढ़कर अब छह हो गई है। यह आंकड़ा राज्य में चल रहे संरक्षण कार्यक्रमों की सफलता को दर्शाता है। इसके साथ ही इस वर्ष पहली बार मांसाहारी वन्यजीवों और गिद्धों की भी विस्तृत गणना कराई गई।
गांवों का विस्थापन और मॉडल गांव की स्थापना
वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए जयगीर और कुजरूम गांवों का सफलतापूर्वक विस्थापन किया गया। इन गांवों के लोगों को पुनर्वासित कर एक मॉडल गांव बसाया गया, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिली है।
हाथियों की घटती संख्या बनी चिंता का कारण
अक्टूबर में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में हाथियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2017 में जहां हाथियों की संख्या 678 थी, वहीं अब यह घटकर मात्र 217 रह गई है। इस गिरावट ने वन विभाग और संरक्षणकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
गौर और सुरक्षा चुनौतियां
पीटीआर क्षेत्र में लगभग 60 गौर (भारतीय बाइसन) पाए गए हैं, लेकिन उन्हें आनुवंशिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय शिकार गिरोह के खुलासे ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। वन विभाग अब हाथियों की संख्या घटने के कारणों की गहन जांच में जुटा हुआ है।
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