एलआईसी शाखा एक में बीमा कर्मचारी संघ का चार श्रम संहिताओं के विरोध में द्वार प्रदर्शन

By Shreya

Published On:

Date:

एलआईसी शाखा एक में बीमा कर्मचारी संघ का चार श्रम संहिताओं के विरोध में द्वार प्रदर्शन

Dhanbad: अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ (AIIEA) के आह्वान पर बुधवार को धनबाद के बरटांड स्थित एलआईसी की शाखा एक, दो, तीन, चार, गोविंदपुर शाखा तथा एसएसएस सेल सहित हजारीबाग मंडल के सभी शाखा कार्यालयों में चार श्रम संहिताओं को लागू करने के विरोध में जोरदार द्वार प्रदर्शन किया गया।

इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बीमा कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व बीमा कर्मचारी संघ हजारीबाग मंडल के अध्यक्ष हेमंत कुमार मिश्रा ने किया। इस अवसर पर सांगठनिक सचिव अमित कुमार, सहायक सचिव सुबीर कुमार राम समेत कई वक्ताओं ने केंद्र सरकार से चारों श्रम संहिताओं को तुरंत वापस लेने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 को वेज कोड (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), सोशल सिक्योरिटी कोड (2020) तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ (ओएसएच डब्ल्यूसी) कोड (2020) को अधिसूचित कर दिया है। बिहार चुनाव में मिली जीत के बाद सरकार अब इन संहिताओं को लागू करने की ओर तेज़ी से बढ़ी है।

ट्रेड यूनियनों ने वर्षों से सरकार से 2015 के बाद से लंबित भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाने तथा श्रम संहिताएँ वापस लेने की मांग की थी। 13 नवंबर को ‘ड्राफ्ट श्रम शक्ति नीति 2025’ पर हुई बैठक और 20 नवंबर की प्री-बजट परामर्श बैठक में भी ये मांगें उठाई गईं, लेकिन सरकार ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ये श्रम संहिताएँ मजदूरों की जगह मालिकों के हितों को बढ़ावा देती हैं। इससे नौकरी की गारंटी समाप्त हो जाएगी, कंपनियों के लिए फैक्ट्रियाँ बंद करना आसान हो जाएगा तथा श्रमिक संगठनों का गठन कठिन हो जाएगा। भविष्य में अधिकांश कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट आधारित नियुक्ति मिलेगी, जिससे स्थायी रोजगार की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

वक्ताओं ने कहा कि कम वेतन, सीमित कौशल विकास और भविष्य की अनिश्चितताओं के कारण मजदूर लगातार कम अवसरों में फँस जाएंगे। यह स्थिति श्रमिकों के जीवन और उनके अधिकारों पर गंभीर प्रहार है।

एआईआईइए ने केंद्र सरकार के इस फैसले को अत्यंत अलोकतांत्रिक, श्रमिक-विरोधी तथा नियोक्ता-हितैषी बताया। संघ का कहना है कि ये संहिताएँ वर्षों के संघर्ष से मिले श्रमिक अधिकारों, वेतन सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर चोट करती हैं। संघ ने आरोप लगाया कि सरकार और कॉर्पोरेट मीडिया इन संहिताओं को ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ बताकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि ये वास्तव में केवल ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ को बढ़ावा देती हैं। अंत में कर्मचारियों ने पुनः मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत इन श्रम संहिताओं को वापस ले और पुराने श्रम कानूनों को लागू रखा जाए।

Also Read: 20 साल बाद भारत को मिली कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी, 2030 में अहमदाबाद में होगा आयोजन

Leave a Comment