Lohardaga: दिसंबर की शुरुआत के साथ ठंड अपने चरम पर पहुंचने लगी है। तापमान में लगातार गिरावट और खेतों में तेज़ी से गिर रही ओस ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ठंड के मौसम में पाला और झुलसा रोग का खतरा बढ़ गया है, जिससे बड़ी मात्रा में सब्जी फसलें प्रभावित हो रही हैं। खेतों में सब्जियों के पौधे मुरझाने लगे हैं और किसानों पर आर्थिक नुकसान का साया मंडराने लगा है।
सब्जी उत्पादन का बड़ा केंद्र है लोहरदगा
कृषि विभाग के अनुसार लोहरदगा जिले में लगभग 5500 हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों की खेती होती है। रबी सीजन में सबसे ज्यादा आलू उगाया जाता है, जबकि धनिया पत्ता, फूलगोभी, पत्ता गोभी, प्याज, लहसुन और टमाटर जैसी सब्जियों की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। यहां उगाई गई सब्जियां न केवल झारखंड के अन्य जिलों में, बल्कि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक भेजी जाती हैं।
ठंड और मौसम में बदलाव से बढ़ा संकट
सब्जी किसानों के सामने इस समय दोहरी चुनौती है —
- झुलसा रोग का बढ़ता प्रकोप
- तेज़ पाला मारने का खतरा
तापमान गिरने के साथ पौधों में झुलसा रोग दिखाई देने लगा है। पत्तियां जलने और मुरझाने लगी हैं।
किसान पहले ही भारी बारिश से नुकसान झेल चुके हैं, ऐसे में अब पाले की मार ने चिंता और बढ़ा दी है।
किसानों तक पहुंच रही कृषि विभाग की सलाह
एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट किसानों को लगातार सलाह दे रहा है कि वे फसलों को पाले से बचाने के उपाय अपनाएं, जैसे —
- शाम में हल्की सिंचाई करना
- फसलों को पुआल या प्लास्टिक से ढंकना
- फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव
- खेतों में धुआं करना
इसके बावजूद किसान चिंतित हैं कि कहीं उनकी मेहनत पर फिर पानी न फिर जाए। कई जगह सब्जियों के पौधे मुरझा चुके हैं और नुकसान साफ दिखने लगा है।
किसानों में बढ़ती बेचैनी
किसानों का कहना है कि मौसम की मार ने इस साल खेती पर गहरा असर डाला है।
पहले बारिश ने नुकसान पहुंचाया, अब ठंड और पाला फसलों को बर्बाद कर रहा है।
सब्जी उत्पादन पर निर्भर किसान आर्थिक संकट की आशंका जताने लगे हैं।
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